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Salami slicing tactics in Karnataka hijab row (Blog in Hindi language)

वैसे तो सलामी स्लाइसिंग का जिक्र आज कल चीन की रणनीति के बारे में किया जाता लेकिन आज हम इस ब्लॉग में समझेंगे कि किस प्रकार मजहबी कट्टरपंथी सनातन संस्कृति धर्म और राष्ट्र को नष्ट करने के लिए चीन के बहुत पहले से कर रहे हैं और स्वघोषित बड़े से बड़ा राष्ट्रवादी व्यक्ति या संगठन न तो इसको स्वयं समझ पाया है न आम जनता को समझा पाया है। पहले संक्षिप्त में समझते हैं सलामी स्लाइसिंग क्या है और चीन इस रणनीति का प्रयोग किस कार्य के लिए करता है। जब विरोधी द्वारा आप को सीधा नुकसान न पहुंचा कर बहुत छोटे छोटे नुक्सान लगभग न के बराबर लगातार पहुँचाया जाये जिसे या तो आप नोटिस न करें या छोटा समझ इग्नोर कर दे पर यही नुकसान दीर्घकाल में आपके लिए बहुत बड़ा नुकसान साबित हो तब इसे सलामी स्लाईसिंग कहा जा सकता है। इसे तीन उदाहरण से ज्यादा स्पष्ट समझें। चीन एक बड़ा देश है, दूसरों कि भूमि पर कब्ज़ा करता है, जैसे कई बार किया है भारत में सेना कुछ किलोमीटर आगे तक चक्कर लगाने भेज दी और वापस लौट गए। भारतीय सेना ने देख लिया पर लड़ने की जरूरत सरकार ने नहीं समझी, कुछ साल बाद फिर आये और चट्टानों पर लिख गए, फिर कुछ सालों बाद टेंट छ...

UP में कांग्रेस: सूत ना कपास, जुलाहों में लट्ठम-लट्ठा..

बलरामपुर में टिकट न मिलने पर  कॉंग्रेस के राष्ट्रीय सचिव को पीटा। इस खबर को सुनकर पहली बात जो दिमाग़ में आई वो ये कि "न सूत न कपास और जुलाहों में लठ्ठम लठ्ठा"। उत्तरप्रदेश में कांग्रेस कि स्थिति नहीं है वो सम्मानपूर्वक चुनाव भी लड़ सके और इसी वज़ह से कांग्रेस ने महिलाओं को टिकट देने का चुनावी दांव खेला है ताकि सहानुभूति स्वरुप कुछ वोट बटोरे जा सकें। कांग्रेस पंजाब, राजस्थान में सत्ता में है वहां कितनी महिलाओं को आगे किया है? पंजाब में तो चुनाव भी हैं क्या वहां भी उत्तरप्रदेश की तरह ही उसी अनुपात में महिलाओ टिकट बांटे गए?  जाहिर सी बात है यह एक चुनावी स्टंट है और ऐसे में टिकट न मिलने पर मार पीट की बात सुन हंसी आती है। अब यह पब्लिसिटी पाने की कोशिश है या सच में मार पीट हुई है ये अभी तय करना थोड़ा मुश्किल है क्यूंकि नेताओं पर भरोसा करना हमेशा से मुश्किल ही रहा है। हालांकि इस खबर ने प्रदेश में गैर कांग्रेसियों को हँसने का मौका जरूर दे दिया है।इस खबर के साथ ही प्रियंका चतुर्वेदी के कांग्रेस छोड़ने का कारण याद करना भी जरूरी है। प्रियंका चतुर्वेदी ने आरोप लगाया था कि मथुरा में उनसे दुर्व...

मोदी सरकार का धन्वंतरि अवतार

निजी मेडिकल कोलेजों में आधी सीटों की फीस सरकारी मेडिकल कॉलेजों के बराबर करना एक शुभ और अच्छी खबर है जबकि प्राइवेट कॉलेजों में फीस करोड़ों में पहुँच जाती है। बड़ी संख्या में छात्रों को चीन, रूस, उक्रेन यहाँ तक कि बांग्लादेश भी चले जाते है क्यूंकि वहां पढ़ना यहाँ की अपेक्षा सस्ता पड़ता है। आज से करीब 17-18 साल पहले जब अटल जी की सरकार गई ही थी और केंद्र में कांग्रेस का बोल वाला था तब एनसीआर में कॉल सेंटर की जॉब बहुत अट्रैक्टिव मानी जाती थी। इसमें डिग्री की कोई बंदिश नहीं स्कुल, कॉलेज में पढ़ रहे कोई समस्या नहीं क्यूंकि नाइट शिफ्ट है बस विदेशी लहजे में अंग्रेजी अच्छी बोलनी आनी चाहिये और उस समय के हिसाब से सैलरी भी अच्छी मिलती थी लगभग 22-35 हजार रूपये। उसी दौरान एक इंटरव्यू के पहले राउंड में एक लड़के से मुलाक़ात हुई। इंटरव्यू लेने वाले ने उसी से पहला सवाल किया, आपकी क्वालिफिकेशन क्या है? कॉन्फिडेंस से भरा उत्तर मिला MBBS। मैं क्या कमरे में मौजूद और खुद इंटरव्यू ले रहा शख्स भी हैरान हो गया। इससे पहले हम ज्यादा सोच पाते उससे दूसरा सवाल पूछा गया, तो कॉल सेंटर में क्यों आना चाहते हो? डॉक्टर हो इससे बह...